1943 बंगाल का अकाल: जिसमें 40 लाख लोग मरे! अंग्रेजों ने मरने के लिए छोड़ा! आज सच जान लीजिए!!

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1943 में आया ‘बंगाल का अकाल’ दुनिया का सबसे बड़ा और भयंकर अकाल के रूप में जाना जाता है। यह भयंकर अकाल को ‘the great bengal famine‘ के नाम से जाना जाता है।

 

अकाल तो एक प्राकृतिक घटना है। मगर इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि बंगाल का अकाल प्राकृतिक रूप से नहीं बल्कि अंग्रेजों की एक बहुत बड़ी गलती की वजह से आया था। और उस समय इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विन्सटन चर्चिल थे। उन्होंने बंगाल के लोगों को अकाल से बचाने के लिए कुछ नहीं किया और मरने के लिए छोड़ दिया।

मेरा यकीन मानिए यह आर्टिकल को पूरा पढ़ने के बाद आपको अंग्रेजों से नफरत हो जाएगी।

तो आइए TOP GYAN  के इस आर्टिकल में आपको मैं बंगाल के अकाल के बारे में पूरी जानकारी देता हूं.

बंगाल का अकाल(the great bengal famine)

 

1943 में आया बंगाल का अकाल इतना भयंकर था, कि इसमें कितनी मौतें हुई इसका सटीक अंदाजा नहीं है। ब्रिटेन के इतिहासकारों के अनुसार इस में 15 लाख लोगों की मौत हुई थी। जबकि भारतीय इतिहासकार कहते हैं कि इस सरकार में 30 से 60 लाख लोग मरे थे। 

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वर्तमान के बांग्लादेश भारत का बंगाल बिहार और ओडिशा के गांव में ऐसा भयंकर अकाल आया था जिसमें खाने-पीने की बेहद कमी हो गई थी कोलकाता और ढाका जैसे बड़े शहरों की तरफ जाने लगे।

कुछ ऐसा था अकाल का दृश्य!!

ग्रामीण लोग जब बड़े शहर पहुंचे तो उनकी मदद करने वाला कोई नहीं था। उनके पास रहने के लिए ना तो जगह थी, ना ही खाने के लिए कुछ था। वह कचरे के ढेर के पास ही रहते थे। खाने के लिए भी कुत्ते बिल्लियों के मुंह से खाना छीन कर खाते थे। हालत इतनी खराब थी कि रोटी के टुकड़े के लिए लोग आपस में लड़ बैठते थे।लोग पेड़ की पत्ती और घास खाकर जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

bengal famine of 1943

कोलकाता और ढाका की सड़कों पर लाशों का अंबार लग गया।लोग भूख से तड़प कर मर रहे थे। माताओ ने अपने बच्चों को नदी में फेंक दिया, क्योंकि वे उसे तड़पते हुए नहीं देखना चाहते थे। बहुत लोगों ने ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या कर ली।

लोग इतने कमजोर हो चुके थे,कि उनको देखने के बाद ऐसा लगता था कि केवल हड्डियों के कंकाल पर चमड़ी चढ़ा दी गई है। वह इतने कमजोर हो गए थे,कि अपने मरे हुए परिजनों के लाश को भी उठाने में असमर्थ थे।

bengal famine of 1943

प्रोफेसर  रफीकुल इस्लाम जो बांग्लादेश के प्रसिद्ध लेखक वैज्ञानिक शिक्षाविद है उन्होंने किसी कार्यक्रम में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि

मैं राहत कर्मियों के छोटे से दल के साथ सेवा कार्य करने हल्दी नदी के पास मौजूद एक बाजार में पहुंचा। वहां वहां मैंने 500 जिंदा निर्वस्त्र कंकाल देखें। जिसमें स्त्री और पुरुष दोनों शामिल थे। उनमें से कुछ आने जाने वालों से भीख मांग रहे थे।कुछ कोने में पड़े थे और अपनी मौत का इंतजार कर रहे थे।कुछ में सांसे लेने भर की भी ताकत नहीं थी।मैं अंदर से पूरा हिल गया।

तो आखिर इतने भयंकर अकाल आने के पीछे क्या कारण था तो आइए जानते हैं।

अंग्रेजों की गलत नीति

बंगाल का अकाल क्यों आया था अगर मैं एक लाइन में कहना चाहूं तो मैं यही कहूंगा कि“दूसरा विश्वयुद्ध और और अंग्रेजों की भर्तियों के प्रति निर्दयता पूर्ण व्यवहार!”

 

वैसे तो दूसरे विश्व युद्ध में भारत की कोई भूमिका नहीं थी। मगर परोक्ष रूप से भारत ने भी बहुत कुछ खोया है।दूसरा विश्वयुद्ध की शुरुआत 1938 में हुई थी जब जापान ने चीन पर हमला किया। इसके 2 साल बाद ब्रिटेन भी इस युद्ध में जुड़ गया। जिसकी वजह से भारत से कई सैनिक ब्रिटेन भेजे गए। ताकि वे युद्ध लड़ सके।

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युद्ध के बीच बंगाल में 16 अक्टूबर 1942 के दिन एक भयंकर तूफान आया। जिसकी रफ्तार 142 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इस तूफान की वजह से 11000 लोग मौत की नींद सो गए और लगभग पूरी फसल बर्बाद हो गए। ब्रिटिश सरकार ने इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और सैनिकों के लिए बंगाल से अनाज खरीद कर जमा करना शुरू कर दिया। वे यह बात जानते थे कि इतना भयंकर तूफान आने के बाद बंगाल में अनाज की कमी हो जाएगी और अकाल और भुखमरी जैसे माहौल उत्पन्न हो जाएंगे। मगर फिर भी उन्होंने बंगाल से अनाज निर्यात करना जारी रखा।

जिसका परिणाम बंगाल के लोगों को भुगतना पड़ा!!

इंग्लैंड के प्रधानमंत्री का निर्णय पूर्ण व्यवहार

1943 के मई जून आते-आते बंगाल के ग्रामीण इलाकों में भयंकर अकाल आ गया लोग भूख से मरने लगे बंगाल के कुछ अंग्रेज अधिकारियों ने इंग्लैंड के प्रधानमंत्री विन्सटन चर्चिल को टेलीग्राम भेजें और बंगाल के संकट के बारे में बताया।

इंग्लैंड में बड़े बड़े अधिकारियों के साथ आपातकाल मीटिंग बुलाई गई। जिसमें बंगाल के अकाल के विषय में चर्चा की गई । यह अपील की गई थी अनाज से भरे कंटेनर वहां भेजो जाए। मगर विंस्टन चर्चिल ने इसे नकार दिया। किसी भी तरह की सहायता करने से साफ मना कर दिया।

और कहा “बंगाल के अकाल के लिए वे लोग खुद जिम्मेदार हैं। मैं भारतीयों से नफरत करता हूं वह लोग जानवर है। और जानवर जैसे धर्म को मानते हैं। उनकी खरगोशों की तरह बच्चा पैदा करने के कारण ही यह स्थिति आई है”

किसी टेलीग्राम के जवाब विंस्टन चर्चिल मैं लिखा “अकाल से अब तक आज नंगे भिखारी गांधी की मौत क्यों नहीं हुई।

तो इस तरह विंस्टन चर्चिल भारत के किसी भी तरह से सहायता करने से मना कर दिया अब बंगाल के लोग केवल मरने के लिए ही जिंदा थे

एक स्टडी में यह दावा किया की…

एक स्टडी से यह पता चला कि 1943 में बारिश अच्छी हुई थी। अकाल जैसी कोई आपदा आने वाली नहीं थी। चर्च इन की गलत नीतियों की वजह से बंगाल का अकाल आया था। चर्च में इसे अकाल घोषित करने से भी मना किया था।

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बंगाल के अकाल का अंत

बंगाल के अकाल की शुरुआत 1943 की मई जून से हुई थी और 1944 के जनवरी फरवरी तक रही। उसके बाद जब चावल की नई फसल आई तब लोगों ने उसे खाया और अपने पेट की आग बुझाई।

आखिरी शब्द

इस पोस्ट में हमने जाना 1993 में आए बंगाल के अकाल के बारे में जिसे the great bengal famine भी कहा जाता है। मैं आशा करता हूं कि आपको यह पता लग गया होगा कि अंग्रेजों की गलत नीतियों की वजह से बंगाल में भयंकर अकाल आया था।

मेरे विचार


मैं जब-जब ऐसी घटनाओं के ऊपर आर्टिकल लिखता हूं,तो मेरा दिल भर जाता है कि हमारे पूर्वजों ने कितना कुछ सहा है। कितने सालों तक हमने गुलामों के जिंदगी बिताई है।मगर दुख तो इस बात का होता है कि आज की पीढ़ी को आजादी का मतलब ही नहीं पता है। उन्हें तो यह पता ही नहीं है कि अंग्रेजो ने हमारे पूर्वजों के साथ क्या-क्या भयंकर अत्याचार किया।

खैर छोड़िए मैं आपको भविष्य में भी ऐसी ऐसी घटनाओं के ऊपर आर्टिकल देता रहूंगा और ऐसी अद्भुत जानकारी अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें

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