महाराजा भूपेंद्र सिंह

पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह: 365 रानी वाले राजा! हिटलर के करीबी दोस्त! आज जाने पटियाला के राजा का इतिहास!!

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पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह की 365 रानियां थी। यह राजा बेहद रंगीन मिजाज के थे।  हिंदू राजाओं की अय्याशी के लिस्ट में इनका भी नाम आता है।महाराजा भूपेंद्र सिंह की गहरी दोस्ती हिटलर के साथ  थी। इनके एक से एक बड़े शौक इन्हें पूरी दुनिया में मशहूर बना दिया था।

तो आइए ,आज हम सबसे ज्यादा रानी वाले राजा भूपेंद्र सिंह के बारे में जानते हैं। उनके द्वारा किए गए महान कामों की चर्चा करेंगे और उनके साथियों की भी चर्चा करेंगे तो चलिए शुरू करते हैं।

पटियाला के राजा भूपेंद्र सिंह की कहानी

 

पटियाला के राजा भूपेंद्र सिंह
महाराजा भूपेंद्र सिंह

महाराजा भूपेंद्र सिंह के पिता का नाम राजा ‘रजिंदर सिंह’ था। जब उनकी मौत हो गई तब भूपेंद्र सिंह केवल 9 वर्ष के थे और तभी से उन्हें पटियाला की रियासत मिल गई। हालांकि औपचारिक तौर पर वे 18 वर्ष के बाद ही महाराजा  बने। उन्होंने 1900 से लेकर 1938 तक शासन किया और अपने समय में ढेरों महान काम भी  किये। इसी बीच हुए अपने रंगीन मिजाज और अजीबोगरीब शौक की वजह से भी पूरे दुनिया में प्रसिद्ध हो गए।

 

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कौन सी रानी के साथ रात बिताएंगे यह ऐसे तय होता था।

जैसा कि मैंने बताया कि पटियाला के राजा के पास 365 रानियां थी।  वे किस रानी के साथ रात बिताएंगे इसका फैसला बेहद अजीब तरीके से होता था।दरअसल महल में हर रोज 365 लालटेन जलाई जाती थी। सभी लालटेन पर अलग-अलग रानियों के नाम लिखे जाते थे।  सुबह जिस रानी के नाम का लालटेन सबसे पहले बुझता था अगली रात महाराजा उसी रानी के साथ रात बिताते थे

महाराजा भूपेंद्र सिंह
महाराजा भूपेंद्र सिंह की पुरानी फ़ोटो

हां पता है,थोड़ा अजीब है मगर महाराजा है उनकी मर्जी ही चलती है।

महाराजा भूपेंद्र सिंह की  दोस्ती हिटलर के साथ


हिटलर और महाराजा भूपेंद्र सिंह काफी अच्छे दोस्त है।एक बार जब महाराजा बर्लिन में थे तब उनकी मुलाकात हिटलर से हुई हिटलर महाराजा से काफी प्रभावित हुआ और हिटलर ने अपनी कार गिफ्ट कर दी। जिसका नाम  my back car था।


महाराजा भूपेंद्र सिंह के खेल में काफी रूचि थी।

 

महाराजा  क्रिकेट और पोलो में काफी रूचि रखते थे।भारत में क्रिकेट को बढ़ावा देने का श्रेय महाराजा भूपिंदर सिंह को ही जाता है। 1911 में ब्रिटेन में क्रिकेट मैच हो रहा था। जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व भूपेंद्र सिंह ने ही किया था।

 

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महाराजा भूपेंद्र सिंह के गाड़ियों का काफिला

इनकी रईसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनके पास 44 रोल्स रॉयस की गाड़ियां थी।इनमें से 20 गाड़ियां राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के लिए रखी गई थी। और महाराजा भूपेंद्र सिंह इन्हीं गाड़ियों में राज्य का दौरा करते थे।

महाराजा का बेहद कीमती हार

उनके मन में सबसे महंगे हार बनवाने की योजना थी। इसके लिए उन्होंने हीरे और मोतियों एक संदूक में भरवा के पेरिस के जौहरी को भिजवा दिया। करीब 3 साल की मेहनत के बाद जब हार बनकर आया तो देखने वाले की आंखें खुली की खुली रह गई। इस हार में 2930 हीरे लगे हुए थे। और इसकी कीमत उस समय करीब 177करोड़ रुपए थी।

तो यह थी पटियाला के महाराजा भूपेंद्र सिंह की कहानी

 

आखिरी शब्द

तो आज इस पोस्ट में हमने जाना कि पटियाला के महाराजा जिनकी 365 रानियां थी और यह महाराज खेलकूद और लग्जरी लाइफ जीने में विश्वास करते थे।

मेरे विचार

मुझे लगता है कि कुछ-कुछ राजा महाराजा इतिहास में अमर होने के लिए ऐसी ऐसी हरकतें करते हैं।आपका क्या विचार है कमेंट करके बताइए।

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