536 ad worst year: इतिहास का सबसे खराब साल!

Year 536 ad: मानव इतिहास का सबसे खराब साल!

शेयर करे

क्या आपको पता है की इतिहास का सबसे खराब साल किसे माना जाता है? नहीं पता तो चलिए। आज के इस पोस्ट में बात करेंगे 536 ad the dark age के बारे में…वैसे तो हर एक घटनाओं में इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मजबूत हो जाता है। मगर 536 ad worst year पर सब इतिहासकारों का एक ही मत है कि “यह इतिहास का सबसे खराब साल है।

तो ऐसा क्या हुआ था 536 ad में? जिसे इतिहास का सबसे खराब साल (536 ad the dark age )माना जाता है। चलिए मैं आज आपको बताता हूं। इस पोस्ट को अंत तक पढ़ने के बाद आपको यकीन हो जाएगा कि बीते वर्ष कोरोनावायरस तो उसके आगे कुछ था।

 

536 ad worst year: इतिहास का सबसे खराब साल!

536 ad के मध्य साल में यूरोप के आसमान में अचानक काले काले बादल छाने लगे। यह बादल इतने ज्यादा घने थे कि सूरज की रोशनी भी नहीं आ रही थी। नतीजतन दिन और रात का फर्क नहीं पता चलता रहा था। शुरुआत में तो लोगों को कुछ समझ नहीं आ रहा था। पर उस समय लोग कर भी क्या सकते थे! देखते ही देखते बादल पूरे यूरोप में छा गया और गर्मियों के मौसम में भी तापमान माइनस में चला गया। यूरोप के साथ-साथ अफ्रीका चीन में भी इसी तरीके के बादल छा गए और वहां पर भी तापमान एकदम से गिर गया।

 

इसे भी पढ़े:

black death pandemic : एक भयंकर महामारी जिससे यूरोप की आधी आबादी खत्म दी!

 

यह रहस्यमई बादल यूरोप के आसमान में 18 महीने तक रहे। इन 18 महीनों में यूरोप और आसपास के देशों के लोगों की जिंदगी नर्क से भी ज्यादा खराब हो गई थी। दरअसल धूप ना होने की वजह से फसलें तबाह हो गई और खेती करना भी असंभव हो गया था। जल स्त्रोत पर भी कुछ राख जैसा पदार्थ छा गया था जिससे वह भी पीने लायक नहीं बचा था। भोजन की कमी के कारण यूरोप में आने वाले समय में भारी अकाल पड़ा। जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई और इसी बीच यूरोप का तापमान हमेशा माइनस में ही रहता।

वह दौर ऐसा था कि चाहे आप अमीर हो या गरीब चाहे आप राजघराने के भी क्यों ना हो! आपको जीवन जीने के लिए संघर्ष करना पड़ता था।

कुल मिलाकर कहा जाएगा यूरोप में हर जगह निराशा ही निराशा थी। इसीलिए इतिहासकार इसे ‘अंधकार युग’ जाने की the dark age कहते हैं।

इसे भी पढ़े:

सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के क्या कारण थे? | सिंधु घाटी सभ्यता की खास बातें!

536 ad में the dark age में रहस्यमई बादल क्या था?

533 ad में यूरोप के आसमान में आए हुए वह रहस्यमई बादल क्या था? उस समय तो किसी को पता नहीं चला। आने वाले हजार सालों के बाद भी वो रहस्यमई बादल का पता नहीं लगा पाए। मगर आज के उन्नत तकनीक की वजह से आज के वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है|  दरअसल आइसलैंड में एक ज्वालामुखी है जिसका नाम माउंट वसुवियस था उस में 536 ad में भयंकर ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था जिसके कारण से यूरोप के आसमान में 18 महीने तक का बादल फैल गए थे।

536 ad अंधकार युग का अंत कैसे हुआ?

विस्फोट के कारण निकला हुआ धुआँ यूरोप के आसमान में 18 महीने तक रहने के बाद इसका अंत धीरे-धीरे होने लगा था  इसी बीच बीच यूरोप में लाखों लोगों की मौत हो गई। इसका अंत अपने आप ज्वालामुखी विस्फोट का प्रकोप कम हो जाने से हुआ 538 के मध्य से जब बादल यूरोप के आसमान से  हटे और बरसात हुई तब लोगों में खुशी की लहर दूरी और लोगों ने वापस से खेती करना शुरू किया और यूरोप के लोगों का जनजीवन पटरी पर लौट आया।

मगर फिर भी इस घटना से यूरोप को भरने में करीब 100 साल लग गए।

 

इसे भी पढ़े:

2000 साल पुरानी नज़का लाइन का रहस्य क्या है? क्या इसे एलियन में बनाया था?

यूरोप के लोगों में अंधविश्वास फैला!

उस समय यूरोप के लोगों में अंधविश्वास भी काफी फैला लोगों का यही मानना था कि “यह सभी ईश्वर के क्रोध का नतीजा है क्योंकि वह हमसे नाराज हो गए हैं।”कुछ लोगों का यह मानना था कि यह दुनिया का अंत है।

 

536 ad के इतिहासकार  ने  Procopius caesareaलिखा…

536 ad के 35 इतिहासकार ने अपनी किताब में लिखा कि “उस समय सूरज केवल चांद जैसा दिखाई देता था। धूप का नामोनिशान नहीं था। ना ही भूख से मुक्त थी और ना ही बीमारियों से!! हर जगह मौत ही नजर आ रही थी।”

इसे भी पढ़े:

2000 साल पुरानी नज़का लाइन का रहस्य क्या है? क्या इसे एलियन में बनाया था?

आखरी शब्द

उम्मीद है कि आपको यह पता चल गया होगा कि 536 ad को the dark age यानी अंधकार युग क्यों कहा जाता है। आप अंदाजा लगा सकते होंगे कि उस समय जीवन जीना कितना मुश्किल होता होगा।

ऐसी अद्भुत जानकारी अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

मेरे विचार

इस घटना को आपके सामने लाने का मकसद यही था कि आजकल की युवा पीढ़ी यह मानने लगी है कि बीसवीं सदी सबसे खराब है। मगर उनको यह भी पता होना चाहिए कि हमारे पूर्वजों ने इससे भी ज्यादा खराब जब देखा है।

आपको बता दूं कि इस घटना का हमारे भारत देश पर कोई भी असर नहीं पड़ा था क्योंकि भारत का इतिहास में इसका कोई जिक्र नहीं मिलता है।

इसे भी पढ़े:

1900 साल पहले का पोम्पेई शहर का भयंकर इतिहास जब 20,000 लोग पत्थर के बन गए। जान लीजिए पोम्पी शहर में क्या हुआ था!

(1918)हाइफा युद्ध:7 समुंद्र पार, मशीन गन VS घोड़े पर सवार भारतीय जोधपुर लांसर! अभी पढ़े भारतीय सेना की वीर गाथा!!

Leave a Comment

Your email address will not be published.