मोनालिसा का पेंटिंग

मोनालिसा की पेंटिंग का रहस्य क्या है? इसकी खासियत क्या है? और आखिर मोनालिसा कौन थी?

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आज से 500 साल पहले बनी हुई मोनालिसा की पेंटिंग अपने आप में सैकड़ों रहस्य लिए हुए हैं। 500 साल बाद भी हम मोनालिसा की पेंटिंग के रहस्य को उजागर नहीं कर पाए हैं । दरअसल 1503 में एक जीनियस जिसका नाम लियन्डो द विंची था। उस व्यक्ति ने मोनालिसा की महान और अमर पेंटिंग को बनाया था।

हाईलाइट:

  • 1530 में फ्रांस के राजा ने मोनालिसा की पेंटिंग को अपने बाथरूम में लगाया था।
  • मोनालिसा पेंटिंग को बनाने में 16 सालों का समय लगाने के बाद पूरी पेंटिंग नहीं बन पाई।
  • मोनालिसा की पेंटिंग में बहुत सारे कोड छुपे हुए हैं।

 

मोनालिसा की पेंटिंग

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आप सभी ने मोनालिसा की पेंटिंग देखी ही होगी। पर क्या आपके मन में ख्याल नहीं आया होगा कि आखिर मोनालिसा की पेंटिंग की खासियत क्या है? देश दुनिया इस पेंटिंग के पीछे पागल क्यों है?और इस पेंटिंग का क्या रहस्य है?आखिर मोनालिसा कौन थी?  तो  यही सब सवालों का जवाब आइए जानते हैं।

मोनालिसा पेंटिंग का रहस्य क्या है?

 

आइए मोनालिसा पेंटिंग का रहस्य क्या है?इसको कुछ मुद्दे से जानने की कोशिश करते हैं।

  • मोनालिसा की पेंटिंग बनाने में आउटलाइन का उपयोग नहीं हुआ है । अभी यहां सबसे बड़ा रहस्य है कि आखिर लियन्डो द विंची ने बिना आउटलाइन के मोनालिसा की पेंटिंग कैसे बनाई होगी? यह काम उनके लिए कितना मुश्किल होगा
  • मोनालिसा की मुस्कान
    मोनालिसा की मुस्कान

    मोनालिसा की पेंटिंग में सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीजें मोनालिसा की मुस्कान! यह हर एंगल से देखने पर मोनालिसा की मुस्कान बदल जाती है।

  • लियन्डो द विंची ने मोनालिसा की पेंटिंग में कुछ कोड भी छुपाए थे। जिस पर रिचार्ज करने के बाद हमें यह कोड मिला ” La risposta si trova qui” जो इटली भाषा में लिखा हुआ है। इसका मतलब है यह है होता है कि “उत्तर यहां है”।
  • कुछ शोधकर्ताओं का यह दावा है कि मोनालिसा की पेंटिंग को आईने से सटाकर देखने पर बीच में एलियन की तस्वीर बनती है। हैरान करने वाली बात है कि लियन्डो द विंची ने अपना सीक्रेट कोड भी वही लिखा था।
  • मोनालिसा की पेंटिंग को दूर से देखने पर मोनालिसा उदास लगती है, तो वही उस पेंटिंग को पास से देखने पर मोनालिसा हल्की सी मुस्कुराती हुई नजर आती है।
  • मोनालिसा की पेंटिंग में मोनालिसा की आइब्रो नहीं है। अब कुछ लोग ऐसा दावा करते हैं कि समय के साथ आइब्रोज जिस पेंट से बनाया गया था वह झड़ गया है।
  • एक सुप्रसिद्ध डॉक्टर नया दावा किया कि मोनालिसा की रहस्यमई मुस्कान के पीछे उसके दो टूटे हुए दांत हैं। और फोटो में उसके ऊपरी होंठ दबे हुए हैं। शायद इसी वजह से उसकी मुस्कान कितनी रहस्यमई लगती है।
  • कुछ मनोवैज्ञानिक का यह दावा है कि मोनालिसा की पेंटिंग में आधा दु:ख के भाव है और आधा खुशी के भाव है।
  • बहुत से इतिहासकारों का मानना है कि मोनालिसा की पेंटिंग में रहस्यमई कोड छुपे हुए हैं। 2010 में इतिहासकार ‘सिलवानो विंसेंटी’ ने यह दावा किया कि “मोनालिसा की आंखों पर रहस्यमई कोड है”। उनका दावा है कि मोनालिसा की राइट आंख पर LV लिखा हुआ है। और लेफ्ट आंख पर C या V भी लिखा हुआ है। उनका दावा है कि LV का मतलब लिआंदो दविंची हो सकता है।

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आखिर मोनालिसा कौन थी?

लियन्डो द विंची के द्वारा बनाई गई महान और अमर मोनालिसा की पेंटिंग में आखिर मोनालिसा कौन थी? इस सवाल का सटीक जवाब किसी के पास है। लियन्डो द विंची एक पेंटर के साथ-साथ राइटर भी थे। उन्होंने अपने किताब या लेखों में कहीं पर भी मोनालिसा का जिक्र नहीं किया है।

ऐसा माना जाता है कि लिआंदो दविंची के स्टूडेंट salai ने अपने पत्रों में ‘लिसा जियोकोंडा’ नाम की पेंटिंग का जिक्र किया है। जो विंची ने अपने आखिरी समय में बनाई थी। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि यही वह पेंटिंग है जिसे आज हम मोनालिसा के नाम से जानते हैं।

फ्रांस के एक व्यक्ति जिसका नाम फ्रांसेस्को डेल गिकोंडो (Francesco del gicondo) था। उसने लियन्डो द विंची को अपनी पत्नी की पेंटिंग बनाने के लिए कहा था। उसकी पत्नी का नाम ‘लिसा जियोकांडो’ था। अब इस बात से यह साबित होता है कि  लियन्डो द विंची के स्टूडेंट सलाई ने अपने पत्रों में जिस पेंटिंग का जिक्र किया था वह मोनालिसा की पेंटिंग थी।

अलग-अलग इतिहासकारों के अनुसार मोनालिसा कौन थी? यह अनुमान लगाया जाता है। आइए मैं आपको अलग-अलग इतिहासकारों के आपको बताता हूँ।

  • Giorgio vasari इतिहासकारों का मानना है कि मोनालिसा की पेंटिंग में लियानो द विंची ही मोनालिसा है कौन सी अपने आप को महिला स्वरूप में देखना चाहते थे
  • कुछ इतिहासकारों के अनुसार यह लिआंदो द विंची की मां थी।
  • कुछ इतिहासकारों का कहना है कि शायद यह मोनालिसा लिंडो द विंची की प्रेमिका थी।

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मोनालिसा पेंटिंग की खासियत क्या है?

मोनालिसा की पेंटिंग इतनी खास है कि इसकी जैसी दूसरी पेंटिंग कोई भी आज तक नहीं बना पाया है! हो सकता है पहली नजर में मोनालिसा पेंटिंग को देखने पर आपको इसमें कुछ खास बात नहीं लगे। मगर यह मोनालिसा की पेंटिंग बहुत खास है! चलिए मैं आपको बताता हूं कि मोनालिसा पेंटिंग की क्या खासियत है।

जरा आप मोनालिसा की पेंटिंग को ध्यान से देखिए कितनी वास्तविकता झलकती है ना! ऐसा लगता है कि मोनालिसा अभी बोल पड़ेगी!

  • दरअसल उस समय जब कोई तस्वीरें बनती थी, तो केवल साइड से बनती थी। वह सभी तस्वीरें कार्टून जैसी लगती थी। मगर इतिहास में यह पहली ऐसी तस्वीर है जो इतनी वास्तविक लगती है।
  • लिआंदो द विंची ने इस पेंटिंग को बनाने में sumato तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक में रंगों का इस तरीके से बारीक इस्तेमाल किया जाता है, की तस्वीर पर पेंट किया गया है यह पता ही नहीं चलता है। एकदम असली लगता है! चाहे आप तस्वीर को कितना भी जूम करके देख ले।
  • लिआंदो द विंची ने इस पेंटिंग को बनाने में 17 तरीके के ऑयल पेंट का इस्तेमाल किया है। यह ऑयल पेंट एक दूसरे पर ऊपर लगाए गए हैं।
  • मोनालिसा की पेंटिंग को बिना आउटलाइन के बनाई गई है। आप इससे इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं, कि बिना आउटलाइन के पेंटिंग बनाना कितना मुश्किल काम है।
  • मोनालिसा की तस्वीर में लोगों की पहली नजर मोनालिसा पर ही पड़े इसीलिए लिआंदो द विंची मैं मोनालिसा की तस्वीर में बैकग्राउंड में बारीक काम नहीं किया है।

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16 साल में बनी मोनालिसा की पेंटिंग!

लिआंदो द विंची ने मोनालिसा की पेंटिंग बनाने मैं 16 साल लगा दिया। फिर भी उनके अनुसार यह पेंटिंग अभी अधूरी ही थी। लिआंदो द विंची 1503 में इस पेंटिंग की बनाने की शुरुआत की थी और इस पेंटिंग को पूरा करने से पहले उनकी मौत 2 मई 1519 के दिन हो गई। इस हिसाब से उन्होंने अपनी जिंदगी के 16 साल इस पेंटिंग को बनाने में लगा दिया। उन्होंने सबसे ज्यादा समय इस पेंटिंग के होठ बनाने में लगा दिया।

लिआंदो द विंची अपने काम से इतना प्यार करते थे, कि वह एक एकदम परफेक्ट चित्र बनाना चाहते थे। वह चाहते थे कि एक ऐसी पेंटिंग बने जो दुनिया में अब तक नहीं हो। इसीलिए उन्होंने अपने जिंदगी के इतने साल इस पेंटिंग में काम करने के बावजूद भी उन्हें यह पेंटिंग अधूरी लग रही थी।

मोनालिसा पेंटिंग की कीमत कितनी है?

आज के समय किसी भी देश में यह ताकत नहीं है कि वह मोनालिसा की पेंटिंग को खरीद ले! क्योंकि उसकी कीमत ही इतनी अधिक है। मोनालिसा की पेंटिंग का सबसे पहला मूल्यांकन 14 दिसंबर 1962 के दिन हुआ था, उस समय उसकी कीमत 100 यूएस डॉलर थी। तो वहीं 2022 में मोनालिसा की पेंटिंग की कीमत 6.4 हजार करोड रुपए है।

मोनालिसा की पेंटिंग इटली से फ्रांस कैसे पहुँची?

मोनालिसा की पेंटिंग इटली से फ्रांस कैसे पहुंची यह बहुत रोचक बात है। चलिए मैं आपको बताता हूँ।, दरअसल 1516 में लिआंदो द विंची को फ्रांस के फ्रांसिस ने अपने यहां आमंत्रित किया। लिआंदो द विंची ने मोनालिसा की पेंटिंग को साथ लेकर फ्रांस चले गए। वहां पर भी मोनालिसा की पेंटिंग पर काम किया। जब 1519 में लिया लिआंदो द विंची की मौत फ्रांस में ही हो गई। फिर मोनालिसा की पेंटिंग को सलाई को सौंप दी गई। जो के लिए लिआंदो द विंची के स्टूडेंट था। इतिहासकार ऐसा बताते हैं कि सलाई में फ्रांसिस राजा को 4000 सोने के सिक्के के बदले बेच दिया। तो कुछ इस तरीके से अनमोल मोनालिसा की पेंटिंग इटली से फ्रांस पहुंची।

 

मोनालिसा की पेंटिंग को बाथरूम में रखा गया

फ्रांस के राजा फ्रांसिस ने 1930 में यह तय किया कि मोनालिसा की पेंटिंग को उनके बाथरूम में लगाया जाए। अतः इस अद्भुत पेंटिंग को फ्रांसिस राजा के बाथरूम में लगाया गया।

 

आखरी शब्द

उम्मीद है कि आपको मोनालिसा की पेंटिंग के क्या रहस्य है? और उसकी क्या खासियत है? इस विषय में जानकारी मिल गई होगी! आज के इस पोस्ट में हमने मोनालिसा की पेंटिंग के विषय में विस्तार से चर्चा किया। आप अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर दीजिए

 

मेरे विचार

इस दुनिया में बहुत कम ऐसी शख्सियत पाई जाती है जिसमें अपने काम को लेकर कितने जुनून है। लिआंदो द विंची में अपने काम को लेकर इतना जुनून था, कि उन्होंने केवल एक पेंटिंग बनाने के लिए अपनी जिंदगी के 16 लगा दिए। आज यह पेंटिंग अमर हो गई है। यह पेंटिंग इतनी खास है कि इस पेंटिंग के जैसी दूसरी पेंटिंग बनाना आज तक असंभव है।

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