रामायण के सच होने के 20 सबूत!

रामायण के सच होने के 20 सबूत! | रामायण के उन जिंदा सबूत

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भारत की इस धरती पर अलग-अलग कालों में त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु और महेश ने अपने अलग अलग अवतारों में अधर्म और पाप का अंत किया है। जिसके बहुत से प्रमाण इस भारतीय धरती पर आज भी देखने को मिलती है। सतयुग काल में सृष्टि के पालनकर्ता विष्णु ने मानव अवतार श्री राम का रूप लेकर इस भारत भूमि पर जन्म लिया था। श्रीराम के जीवन काल के पूरे घटनाक्रम का विवरण बाल्मीकि के द्वारा रचित हिंदू ग्रंथ रामायण में देखने को मिलता है।

भगवान श्री राम हिंदुओं के आस्था से जुड़ी एक कल्पना मात्र नहीं है  कई लोगों को आज भी रामायण काल के वास्तविकता पर विश्वास नहीं होता है और वो रामायण ग्रंथ में वर्णित सभी घटनाओं को काल्पनिक चित्रांकरण में व्यक्त कर देते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि वैज्ञानिकों के अध्ययनों के आधार पर सिद्ध हो चुका है कि रामायण में दर्शित सभी घटनाएं सत्य है और रामायण के सबूत के आधार पर इसकी पुष्टि की जा चुकी है।

इस लेख में हम आपको रामायण के उन जिंदा सबूत के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें जानने के बाद आपको भी श्रीराम के अस्तित्व के होने का प्रमाण मिल जाएगा। आइए जानते हैं रामायण के सच होने के 20 सबूत!!

रामायण के सच होने के 20 सबूत!!

रामायण और राम अदि काल से लोगों के भक्ति भावना का केंद्र बने हुए हैं। रामायण के अनुसार भगवान श्रीराम ने अधर्मी रावण को मारकर एक कुशल राष्ट्र और धर्म की स्थापना की थी। जैसे इस धरती पर बहुत से लोगों की अंध आस्था श्रीराम के प्रति झलकती है, तो बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो राम के जन्म और रामायण के घटनाक्रम पर कई सवाल करते हैं। उन्हें रामायण काल के कुछ अद्भुत कथाएं काफी आश्चर्य करती हैं और इन पर विश्वास नहीं कर पाते हैं। तो चलिए आप को रामायण के सबूत बताता हूं

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1. अयोध्या का हनुमानगढ़ी

अयोध्या का हनुमानगढ़ी
अयोध्या का हनुमानगढ़ी

माना जाता है कि श्रीराम की प्रतीक्षा हनुमान इसी स्थल पर करते थे। राम निवास अयोध्या में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, जिसे हनुमानगढ़ी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को यह जगह रहने को दिया था,जिसके कारण इसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है। मान्यता है कि श्रीराम के दर्शन के पूर्व अयोध्या में श्री हनुमान जी के दर्शन हनुमानगढ़ी में करने से मनोकामना जल्दी पूरी होती है। रामायण में भी हनुमानगढ़ी का उल्लेख किया गया है।

2. हनुमान जी के विशाल पद चिन्ह

रावण द्वारा सीता हरण के बाद जब हनुमान जी माता सीता की खोज में श्रीलंका पहुंचने के लिए समुद्र को पार करने हेतु एक विशाल रूप धारण किये। तब उनके विशाल पद चिन्ह के छाप श्रीलंका के स्थल पर अंकित हो गए। यह अभी रामायण के साक्ष्य को दर्शाता है।

3. सांप के समान शिरानुमा गुफा

रामायण के अनुसार रावण द्वारा सीता का अपहरण करके श्रीलंका में सबसे पहले एक गुफा में रखा गया था। इस गुफा का शीष और इसके चारों ओर की नक्काशी कोबरा सांप की तरह दिखाई देता है। इसकी उपस्थिति भी रामायण के सबूत बताते हैं।

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4. रावण का महल

लंका में रावण का महल था, जिसमें वह अपनी रानी मंदोदरी के साथ रहता था। हनुमान जी ने अपने पूछ से रावण की इस विशाल सोने की लंका को जला दिया था। जिसके जले हुए अवशेष आज भी श्रीलंका में देखने को मिलती है।

5. अशोक वाटिका/सीता एलिया

अशोक वाटिका का चित्र
अशोक वाटिका का चित्र

रामायण ग्रन्थ के अनुसार माता सीता को अपहरण के बाद जब माता ने लंका में जाने से मना कर दिया, तब रावण ने लंका की अशोक वाटिका में उन्हें रखा था। अशोक वाटिका में व्यापक मात्रा में अशोक वृक्ष थे, यहीं पर एक वृक्ष के नीचे माता सीता रहती थी। इस जगह को अब सीता एलिया नाम से जाना जाता है, जो वर्तमान में श्रीलंका में स्थित है।

6. गर्म जल के कुएं

रामायण बताया गया है कि रावण ने अपने दानवीय शक्तियों के प्रमाण के लिए लंका में गर्म जल के कुएं बनवाए थे। इससे गर्म पानी निकलता है, जो आज भी श्रीलंका में देखने को मिल जाएगी।

7. रामसेतु का निर्माण

भारत से श्रीलंका की ओर के लिए राम और उनकी सेना ने पत्थरों को समुद्र में फेंक राम सेतु का निर्माण किया था। इन राम सेतु पुल के सहायता से सभी वानर सेना लंका में प्रवेश कर पाए थे। कहा जाता है कि जिन पत्थरों से रामसेतु पुल बनाया गया था, वह पत्थर आज भी समुद्र में तैरते हुए दिखाई देते हैं। जिसमें श्रीराम का नाम लिखा हुआ है। नासा ने भी अपने एक शोध के बाद बताया है कि यह रामसेतु मानव द्वारा निर्मित है।

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8. द्रोणागिरी पर्वत

द्रोणागिरी पर्वत
द्रोणागिरी पर्वत

रामायण के कथा में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मण और मेघनाथ के युद्ध में मेघनाथ के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, उनका बचना लगभग असंभव माना जा रहा था। तब राजवैद्य सुरोन के उपाय के अनुसार द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाना था। किन्तु हनुमान जी ने पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा ले आये। जिसमे से संजीवनी बूटी निकाल कर लक्ष्मण के प्राण की रक्षा की गई। माना जाता है कि संजीवनी बूटी में इतनी शक्ति है कि वो मरने वाले व्यक्ति की प्राण को भी बचा सकता है। लक्ष्मण जी के ठीक होने के बाद हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत उसी स्थान पर रख दिया, जो आज भी उत्तराखंड के चमोली गांव में स्थित है।

9. लेपाक्षी मंदिर

द्रोणागिरी पर्वत
द्रोणागिरी पर्वत

सीता हरण के बाद रावण माता सीता को जिस मार्ग से लंका ले जा रहे थे, उस मार्ग पर राम भक्त जटायु ने रावण को रोकने के लिए युद्ध किया, लेकिन रावण ने जटायु के दोनो पँख काट के उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिसके बाद वो घायल अवस्था में श्रीराम के सामने गिरे और उनकी गोद में ही अपना शरीर त्याग दिया। जिस स्थल पर जटायु गिरे, वहां लेपाक्षी मंदिर का निर्माण किया गया। जो आज भी आंध्र प्रदेश में देखा जा सकता है।

 

10. पंचवटी

मान्यता है कि जब राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के लिए निकले थे, तो वह नासिक पंचवटी जंगल में रहते थे। इस जंगल में लक्ष्मण ने रावण की बहन सुपनखा की नाक काट दिए थे। यह पंचवटी वन आज भी नासिक में है।

11. विशालकाय हाथी के अवशेष

श्रीलंका के रक्षक के रूप में रावण ने द्वार पर विशालकाय हाथी को रखा था। जिसे हनुमान जी ने धाराशयी कर दिया था। वैज्ञानिक प्रमाण में लंका की स्थल के पास इतने विशालकाय हाथियों के अवशेष मिले हैं, जो सामन्य हाथियों से बहुत बड़े हैं।

12. श्रीलंका की काली मिट्टी

रामायण में बताया गया है कि रावण की सोने की लंका, श्रीलंका में विशाल स्तर पर फैला हुआ था। जिसे हनुमान जी ने जलाकर राख कर दिया था, जिसके प्रमाण का अनुमान वर्तमान में श्रीलंका में मिलने वाली काली मिट्टी से लगाया जा सकता है। आज भी बहुत से स्थलों की मिट्टी पूर्णरूप से काली है।

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13. कोनेश्वर मंदिर

रामायण में उल्लेख है कि रावण ने शिव भक्ति करके भगवान शिव से दस सिरों का वरदान मांगा था। जिसके बाद रावण ने कोनेश्वर मंदिर की स्थापना की थी। जहां आज भी रावण के आकृतियों को देखा जा सकता है। यह दुनिया का पहला ऐसा मंदिर है, जहां रावण की कई आकृतियों को देखा जा सकता है।

14. राम लिंगम / शिवलिंग की स्थापना स्थल

श्रीराम ने जब रावण की हत्या की,तो उन पर एक ब्राम्हण हत्या का आरोप लगा। जिसे दूर करने के लिए उन्होंने भगवान शिव की आराधना की, जिसके लिए शिवजी ने उनसे चार शिवलिंग की स्थापना करने की मांग की। तब एक शिवलिंग सीता ने बनाया, दो शिवलिंग को हनुमान जी कैलाश से लाए और एक भगवान श्रीराम ने अपने हाथों से बनाया। इस तरह चार शिवलिंग का प्रमाण रामलिंगम आज भी देखा जा सकता है।

15. दीवुरमपोला

श्रीलंका में स्थित वह जगह है। जहां एक पेड़ के नीचे माता सीता ने श्रीराम के कहने पर अपनी पवित्रता सिद्ध करने के लिए अग्नि परीक्षा दी थी।

16. कोंडा काटू गाला

हनुमान द्वारा लंका को आग लगाने के बाद रावण द्वारा सीता को अशोक वाटिका से हटा कर कोंडा काटू गाला गुफा में सर रख दिया गया था। जहां कई ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो रावण के महल को जाने वाले गुफाओं से मिलते जुलते हैं।

17. सुग्रीव की गुफा

सुग्रीव की गुफा
सुग्रीव की गुफा

कर्नाटक के हम्पी शहर में एक किष्किंधा पर्वत थी। जहां दो वानर भाई सुग्रीव और बाली की गुफा और साम्राज्य था। यहीं पर सुग्रीव को श्रीराम ने अपने अधर्मी भाई बाली से मुक्ति दिलाई थी, जिसके कई साक्ष्य आज भी देखने को मिल जाएंगे।

18. शिवरीनारायण

रामायण के अनुसार अपने वनवास के दौरान छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में श्रीराम की भेंट उनके भक्तिन शबरी से हुई थी, जिनके झूठे बेर श्रीराम ने खाए थे। शिवरीनारायण में राम के आने के प्रमाण आज भी देखने को मिल जाएगी। सबरी और नारायण के नाम पर ही इस जगह का नाम शिवरीनारायण रखा गया।

19. जानकी मंदिर

जानकी मंदिर
जानकी मंदिर

यह नेपाल के जनकपुर शहर में है। जहां पर माता सीता का जन्म हुआ था, इन्हीं के नाम पर यहां जानकी मंदिर का निर्माण किया गया है। जहां पर आज भी लाखों लोगों का आना जाना है।

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20. पानी में तैरते पत्थर

राम सेतु के लिए उपयोग में लाये गये, सुनामी के बाद समुद्र में अलग अलग स्थलों पर भी तैरते हुए दिखाई देते हैं। जो रामायण के सच होने के सबूत को बखूबी दर्शाते है।

दोस्तों, रामायण के इन सबूतों को जानने के बाद आपको यकीन हो ही गया होगा कि रामायण के जिंदा सबूत आज भी इस धरती पर उपलब्ध है।

इस लेख को पढ़ने के बाद उम्मीद है कि जिन लोगों को भी श्रीराम के अस्तित्व को लेकर सन्देह था, वो दूर हो गई होगी। ramayan ke saboot को पढ़ने के बाद आपके ह्रदय में भी हिंदू धर्म और श्रीराम के प्रति आस्था जागृत हो गई होगी।उम्मीद है की आपको रामायण के सच होने के 20 सबूत पसंद आया होगा !

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धन्यवाद!

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