कलश जनजाति की महिला

कलस जनजाति पाकिस्तान: यहाँ की महिलाएं बेहद खुली सोच की!

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आमतौर पर ‘जनजाति’ का नाम सुन तेही हमारे मन में जंगलों में रहने वाले लोग अजीब सी वेशभूषा और अजीबोगरीब नियम वाले लोग आते है। मगर आज हम लोग बात करने वाले हैं पाकिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कलस जनजाति के बारे में! जो बेहद आधुनिक विचार के हैं तो आइए आज हम पाकिस्तान में मौजूद कलर्स जनजाति के विषय में सब कुछ जानकारी लेते हैं।

हाईलाइट:

  • यहां की महिलाएं अगर दूसरे मर्द को पसंद करती है तो वह पुराने मर्द को छोड़ कर भाग जाती है और बाद में दोनों शादी कर लेते हैं भले ही वह महिला पहले से ही शादीशुदा क्यो न हो!
  • कलर्स जनजाति लोगों के मरने पर दुख नहीं बल्कि खुशी जताती है।
  • इनका समाज पुरुष प्रधान नहीं बल्कि महिला प्रधान है।
  • कलस जनजाति के कुछ लोगों के मुताबिक पाकिस्तान कट्टर मुस्लिमा वाद देश होने के कारण उनका रहना मुश्किल होता है।

कलस जनजाति के विषय में पूरी जानकारी

कलस जनजाति अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बॉर्डर पर हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला पर कैलाश वैली में रहती है। सामान्य तौर पर यह पाकिस्तानी नागरिक होते हैं। मगर अपनी विशेष परंपरा कल्चर नीति नियम की वजह से दुनिया भर में यह जनजाति प्रसिद्ध है।

यूं तो कलस जनजाति की संस्कृति बेहद खूबसूरत है। मगर यहां के लोगों के जरिये निभाई जाने वाली कुछ परंपराएं हैं। जो आपको जरूर जानी चाहिए, जैसे कि यहां की अनोखी शादी किसी की मौत पर दुख नहीं बल्कि खुशी जाहिर करना, इनका समाज स्त्री प्रधान है, अजीबोगरीब त्योहार!

आइए कलश जनजाति के विषय में कुछ रोचक बातें हैं वह जान लेते हैं।

कलस जनजाति में मौत पर दुख नहीं खुशी मनाई जाती है!

अगर इस जनजाति में किसी की मौत हो जाती है, तो उस जनजाति के लोग दुख नहीं मनाते हैं। बल्कि खुशियां मनाते हैं,क्योंकि इनका मानना है कि “जिस तरीके से किसी के पैदा होने पर खुशीया मनाई जाती है, उसी तरीके से किसी की मौत पर भी खुशियां मनाई जानी चाहिए“। इनके मतानुसार जाने वाले व्यक्ति इस दुनिया से जाने वाले व्यक्ति को खुशी खुशी विदा करना चाहिए

इसीलिए  जिस व्यक्ति की मौत हो जाती है उसे 1 दिन के लिए रखा जाता है। पूरे कबीले के लोगों को दावत दिया जाता है। दावत में बकरे और बैल का मांस और ढेर सारा शराब परोसा जाता है। महिलाएं और पुरुष भी साथ मिलकर शराब पीते हैं। नाचते गाते हैं और खुशियां मनाते हैं।

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परिवार की मालकिन महिलाएं ही होती है!

कलर्स जनजाति की महिलाओं पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी होती है। महिलाये भेड़ बकरियां चराने घर के काम के साथ-साथ रंगीन पर्स और मोतियों की माला बनाती है जिससे पुरुष शहरों में जाकर बेचते है।

महिलाओं को मनपसंद पुरुष से शादी करने आजादी है।

एक तरफ पाकिस्तान जैसे देश में जहां पर महिलाओं के अधिकार और आजादी बहुत ही कम होता है। कम उम्र में शादी करा दी जाती है। तो उसी पाकिस्तान में यह जनजाति भी है जहां पर महिलाएं बेहद खुली विचार की है। इन्हें आजादी भी भरपूर मिली हुई है। दरअसल, इस जनजाति के मुख्य तीन त्योहार होते हैं कैमोस, जोशी और उचाव!

इसमें से कैमोस बेहद महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। यह त्यौहार 14 दिन चलता है, जिसमें महिलाएं और पुरुष शामिल होती है। यदि किसी महिला को कोई व्यक्ति पसंद आ जाता है और वह व्यक्ति को भी महिला पसंद आ जाती है तो दोनों भाग जाते हैं। भले ही वह महिला शादीशुदा क्यों ना हो! भाग जाने के बाद कुछ दिन बाद वह वापस लौट कर आते हैं। दोनों परिवार वालों के यह तसल्ली करने की बाद की लड़की जबरदस्ती नहीं भागी है। उन दोनों की शादी करा दी जाती है। इस दौरान उस महिला का पहला पति किसी भी तरीके की तकरार नहीं करता है।

किसी न्यूज़ चैनल को इंटरव्यू देते समय एक कालसी महिला ने कहा कि “हमें शादी करने के लिए हमारे परिवार वालों की तरफ से किसी भी तरीके का दबाव नहीं होता है” हम जब मर्जी कब शादी कर सकते हैं और शादी को तोड़ ही सकते हैं”।

 

कलर्स जनजाति का त्यौहार

कलर्स जनजाति में मुख्य रूप से तीन त्योहार होते हैं। कैमोस, जोशी और उचाव! आइए इन तीनों त्योहारों के विषय में विस्तार से जानकारी लेते हैं

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कैमोस

कलर्स जनजाति का मुख्य त्यौहार कैमोस है यह सवार 14 साल का होता है जिसमें महिलाएं अपना जीवन साथी हो जाती है।

जोशी

इस व्यवहार को ‘चिल्लम जोशी’ भी कहा जाता है। यह मई महीने के मध्य में मनाया जाता है। यह त्यौहार 1 दिन का होता है और इसमें गांव के पुरुष और महिलाएं एक साथ नृत्य करते हैं

उचाव

यह त्यौहार शरद ऋतु में मनाया जाता है। कलस जनजाति में यह त्यौहार प्रकृति को धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है। इसमें फल,फूल, दूध, अनाज प्रकुति को भेंट के रूप में चढ़ाया जाता है।

कलस जनजाति में मासिक धर्म को अपवित्र माना जाता है।

माना कि इस जनजाति में महिलाओं को बेहद आजादी मिली हुई है। मगर महिलाओं के लिए ही कुछ पबंदी भी है। जैसे कि कलस जनजाति में महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान घर के बाहर बने छोटे से कमरे में रहना पड़ता है। वहां पर सारी सुख सुविधाएं मिलती है। पीरियड खत्म होने के बाद वह नहा धो कर वापस अपने घर में परिवार के साथ रहने लगती है।

यहां के लोगों का यह मानना है कि मासिक धर्म के दौरान अगर महिला किसी को छुए तो ईश्वर नाराज हो जाते हैं जिससे बाद और अकाल आने की संभावना रहती है।

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कलस जनजाति की आबादी

वैसे कलर जनजाति कैलाश वैली में सदियों से रह रही है। मगर किसी भी सरकार ने इन पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया। अंत में 2018 में पाकिस्तानी सरकार ने इन्हें जनगणना में शामिल किया गया जनगणना के आंकड़ों के अनुसार इनकी आबादी 4,000 के करीब है।

कलस जनजाति की अर्थव्यवस्था

कलर्स जनजाति की अर्थव्यवस्था का आधार पशुपालन और खेती तो है ही मगर बदलते समय के साथ इनकी अर्थव्यवस्था में पर्यटक भी काफी अहम भूमिका निभा रहे हैं। यहां पर आने वाले पर्यटक यहां पर मौजूद गेस्ट हाउस में रुकते हैं और यहां पर कलर्स जनजाति के लोगों ने छोटी-छोटी दुकानें बना रखी है जहां या लोग हाथ से बनी हुई वस्तुएं बेचते हैं।
इसके अलावा कैलाश वैली में जाने के लिए सैलानियों को पाकिस्तान सरकार को एक तरीके का टोल देना पड़ता है। उस पैसे को इनके जीवन स्तर को सुधारने में लगाया जाता है।

पाकिस्तान में रहना उनके लिए मुश्किल है।

कलर्स जनजाति के लोगों के अनुसार पाकिस्तान का हिस्सा होना उनके लिए एक श्राप से कम नहीं है। क्योंकि पाकिस्तानी लोग अक्सर इन्हें काफिर कहते हैं। आए दिन यहां जोर जबरदस्ती धर्म परिवर्तन, लूटपाट, हत्या जैसे मामला होते रहते हैं। यहां तक कि वहां के मुसलमान उनके जमीन और पशुओं को भी जप्त कर लेते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस जनजाति की आबादी 4000 से बहुत अधिक है। परंतु मुस्लिमों के दबाव में आ जाने के कारण कईयों ने अपना धर्म परिवर्तन कर दिया। उस क्षेत्र के आसपास रहने वाले मुस्लिमों के पूर्वज भी कलस जनजाति के ही हैं।

आखिरी शब्द

तो आपको पाकिस्तान की कलस जनजाति के विषय में यह सभी रोचक जानकारियां कैसी लगी! उम्मीद है आपको पसंद आई होगी! इस पोस्ट में हमने कलस जनजाति मैं होने वाले अनोखी शादी, महिलाओं के खुलेपन मौत पर दुख की बजाय खुशियां मनाना, और इनकी आबादी को लेकर खूब गहरा अध्ययन किया।

मेरे विचार

एक सवाल जो मेरा मन बार-बार मेरे से पूछ रहा है कि “आखिर पाकिस्तान जैसे कट्टरवादी देश में इन्होंने इतने साल तक अपनी संस्कृति को कैसे बचा के रखा”!  इससे यह साबित होता है कि, यह लोग अपने संस्कृति और अपने परंपराओं के सर्वोपरि है वरना आपको तो मालूम ही होगा कि आजादी के समय पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या 20% जितनी थी और आज के समय में 1% से भी कम हिंदू रह गई हैं। खैर छोड़िए वह अलग चर्चा का विषय है। आपको कलर्स जनजाति के विषय में यह जानकारी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

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